मुस्कानदूत में पढ़िए- देखिए धांसू चुटकुले, मज़ेदार सटीक कार्टून और अन्य रोचक सामग्री आप अपने छंटे हुए जोक/लतीफ़े/चुटकुले, कार्टून और गुदगुदाने वाले रोचक प्रसंग ई-मेल द्वारा भेजिए खुद मुस्कराइए, मुस्कान बांटिए और अपना परलोक सुधारिए ई-मेल करें- कार्टूनिस्ट चन्दर
हंसिए क्योंकि यही वह दूसरी सर्वोत्तम चीज है जिसे आप अपने होंठों से सम्पन्न कर सकते हैं।- टूनजोक

कार्टूनेचर फ़ीचर सेवा

Monday, January 6, 2014

कुदाई

कूद
कल्लू- चलो आज कुतुब मीनार चलते हैं।
लल्लू- ओके! पर हम वहां जाकर करेंगे क्या?
कल्लू- हम वहां कूदन-कुदाई खेलेंगे।
लल्लू- वह कैसे?
कल्लू- देखो, सबसे पहले हम कुतुब मीनार पर चढ़ेंगे...
लल्लू- अच्छा, फ़िर?
कल्लू- पहले मैं तुमसे कहूंगा कि कूदो तो तुम कूद जाना। फ़िर वापस आकर तुम मुझसे बोलना कि कूदो तब मैं भी कूद जाऊंगा!
चित्र: चन्दर
http:/cartoonnewshindi.blogspot.in/

Friday, December 27, 2013

मुस्कान

जय मुस्कान!
मेरे कार्टूनिस्ट और कर्टूनप्रेमी मित्रो, मेरा विचार है कि अच्छे कार्टूनों का हिन्दी में एक टेब्लॉइड पीडीएफ़ अखबार निकाला जाए। इस अखबार में कार्टून की अधिकता हो और टाइप की हुई सामग्री न्यूनतम हो यानी आम अखबारों के उलट। यों अभी अखबारों ने कार्टून कला की ओर से मुंह फ़ेर लिया है। कार्टून फ़ोकट की चीज़ बनकर रह गये हैं जो कार्टूनिस्टों के द्वारा इण्टरनेट पर सहज उपलब्ध करा दिये जाते हैं। इस कार्टून प्रधान अखबार को अभी या बाद में अखबारी कागज़ पर छापा जाए- साधन होने पर। अभी इस अखबार को पीडीएफ़ के रूप में देस-विदेश में ई-मेल द्वारा सदस्यों को भेजा जाए। ज़ाहिर है इसके लिए अच्छे कार्टूनों की आवश्यकता होगी ही। रोना वही कि फ़िलहाल मेहनताना नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सक्षम होने का प्रयास किया जाएगा, शुरूआत तो हो! सामग्री में विविधता होगी. यह पक्का है। आप लोगों की सहमति हो तो एक अंक बनाया जाए। पर इसके लिए कुछ कार्टूनिस्ट मित्रों के ५ (छपे/बिन छपे) कार्टून/कार्टून स्ट्रिप/कैरीकेचर/फ़ीचर, सचित्र (फ़ोटो सहित) आत्म परिचय वगैरह चाहिए ही चाहिए। कार्यक्रम तय होने पर व्यवस्था हेतु दक्षिणा १०१ (101) या ९९ (99) रुपये रुचि रखने वाले कार्टून प्रेमी यह मामूली सहयोग देंगे तो गाड़ी चल पड़ेगी। इस कार्य में प्रायोजक या विज्ञापन दाता का सहयोग सन्देहात्मक है। वैसे यदि आपके सम्पर्क में कार्टून प्रेमी प्रायोजक या विज्ञापन दाता हैं तो उनको इस पावन कार्य में पुण्य कमाने का न्यौता हैं। उल्लेखनीय है कि मेरा यह प्रयास हम सभी या अधिकतम कार्टूनिस्टों का एक अच्छा मंच बनाने की दिशा में एक कदम है व्यवसाय या धन्धा नहीं। कुछ और जानना-पूछना चाहें तो बिना संकोच सम्पर्क करें- फ़ेसबुक के माध्यम से या cartoonistchander@gmail.com (यहां मेरे हिन्दी पाक्षिक ‘मीडिया नेटवर्क’ के एक पुराने अंक के २ पृष्ठ दिये गये हैं, देखें) लिन्क- http://www.medianetworkweb.blogspot.in/

Wednesday, July 3, 2013

भोजन

कुछ भी
पत्नीखाने में क्या बनाऊँ?
पतिकुछ भी बना लो, क्या बनाओगी?
पत्नी- जो आप कहें।
पतिदाल-चावल बना लो।
पत्नी- सुबह ही तो खाए थे।
पतितो रोटी-सब्जी बना लो। 
पत्नी- मुझे तली हुई चीजों से परहेज़ है।
पतितो अंडा-भुर्जी बना लो।
पत्नी- आज बृहस्पतिवार है।
पतिपरांठे?

पत्नीरात को परांठे नहीं खाने चाहिए।
पतिकढ़ी-चावल?पत्नी- दही नहीं है।
पतिइडली-सांबर?पत्नी- समय लगेगा पहले बोलना था।
पतिहोटल से मंगवा लेते हैं।
पत्नी- रोज़-रोज़ बाहर का खाना ठीक नहीं है।
पतिअच्छा मैगी बना लो।
पत्नी- पेट नहीं भरेगा।
पतितो फिर क्या बनाओगी?पत्नीजो आप कहें...

Friday, June 14, 2013

Hospital to home

1. Drawing cartoon from ventilator bed-I
Cartoonist TC Chander drawing cartoon from his ventilator bed, while he was admitted at Sant Paramanand Hospital, Civil Lines in Delhi. 
(19th May, 2013, 04 47 46 pm)
2. Drawing cartoon from ventilator bed-II
Cartoonist T C Chander drawing cartoon from his ventilator bed, while he was admitted at Sant Paramanand Hospital in Delhi.
(19th May, 2013, 04 50 32 pm)

Hospital to home 
May 17-24, 2013


Video-photo: Vishal K Chander

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